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कहानी ( वैलेन्टाइन डे पर विशेष)

                       कहानी (वैलेन्टाइन डे पर विशेष)                                *   संयोग  *                                      -----------------           नीलम अपने मनपसंद सुर्ख लाल रंग की साड़ी में और उसी से मिलता मेकअप किए हुए विक्की के साथ एक सुन्दर से रेस्तरां में डिनर के लिए आई हुई थी। पहले से आरक्षित मेज पर वह अपने ही विचारों में गुम बैठी थी कि अचानक विक्की से बोली...ज उसके सौन्दर्य पर मोहित सा एकटक उसे निहार रहा था...''सुनो...कितनी गजब बात है न..." "क्या ?"  विक्की चौंक कर कुछ विस्मृत से लहजे में बोला... "यही...कि ईश्वर ने हमारे लिए यह दिन कितना स्पेशल बना दिया..."  "हां...ल लेकिन इसमें गजब क्या है...?  यह तो सबके लिए खास दिन ही होता है..." कंधे उचकाते हुए विक्की ने जबाव ...

"जादू ढाई अक्षर का"

बस यूं ही....                                 "  जादू ढाई अक्षर का "             भक्तिकाल के संत कवि कबीर ने कहा है कि "ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पंडित होय।"  इन पंक्तियों की गहराई का तो पता था किन्तु ढाई आखर की शक्ति आज समझ में आती है। स्पर्श, स्नेह, प्यार, प्रीत, आत्मा और तुष्टि.... ये ढाई अक्षर सम्पूर्ण जीवन का सार हैं। ये ही जिन्दगी का मूल आधार हैं।              'स्पर्श ' में वह शक्ति है जो संसार का बड़े से बड़ा ग़म अपने आगोश में समेट कर स्पर्शित काया को ' स्नेह ' रूपी  तेल में डुबोकर उसे सराबोर कर देता है। 'स्नेह ' में डूबते ही मन पूरी तरह से शिशु बन जाता है एवं उस स्नेहिल सागर की अतल गहराई में डूबने-उतरने लगता है। ' प्यार की गहराई के समक्ष संसार की व्यापकता सिमट कर रह जाती है। जगत का कोई भी व्यक्ति, जीव अथवा प्राणी ऐसा नहीं है जिसे प्यार नहीं चाहिए। हर कोई दिन रात बस प्यार में खोय रहना चाहता है, ताकि वह उसको पूर्ण रूप ...
दिनाँक        - 09/12/2017                          **लघु कथा**                             *******        अभी - अभी एक कम्पाउंडर बड़ी तेजी से आया और उसके बेटे को ऊपर आई.सी.सी.यू. में बुलाकर ले गया। उसने कान में कुछ कहा और पलक झपकते ही उसके दोनों बेटे गायब...उसे समझते देर नहीं लगी कि कुछ खास बात है... क्योंकि अबकी बार वह लड़का आम लोगों की लिफ्ट से न आकर डाक्टर वाली से आया था...समझती भी क्यों नहीं? पूरे पांच दिनों से वह अपने पति के ठीक होने की प्रतीक्षा में उस अस्पताल में अनेक गतिविधियां देख रही थी और वहीं के मंदिर में घंटों ईश्वर से प्रार्थना करती रहती।... लेकिन अभी उस लड़के के बुलावे में और चाल दोनों में कुछ अलग ही था जिसने उसे बेचैन कर दिया... अजीब सी घबराहट..व्याकुलता...        बहुत देर हो गई वह टहलते हुए और लिफ्ट की तरफ टकटकी लगाए थक गई उसने अपनी दोनों बेटियों की ओर देखा जो उसी की तरह प...

एक कथा-काव्य- 'मेरी आंखों का खयाल रखना'

                                "मेरी आंखों का खयाल रखना"                 __________________________ एक थी लड़की, बहुत ही प्यारी बहुत ही सुन्दर, बहुत ही न्यारी सब कुछ था , दामन में उसके रूप रंग गुण आंखों में सपने   लेकिन कुदरत ने किया मजाक          नज़रें तो दीं  पर न दिया उजास करती थी प्यार वो जिसको देख नहीं सकती थी उसको लड़का भी चाहता बेपनाह पर दिल से उठती इक आह लड़की उससे जब भी मिलती एक ही बात उससे कह उठती काश! मैं तुम्हें देख जो पाती तो तुमसे ही करती मैं शादी एक दिन हुई यह तमन्ना पूरी अंधेरे से हो गई उसकी दूरी दान में दे दी आंखें किसी ने बची न कमी कोई जिंदगी में सर्वप्रथम प्रेमी को देखना चाहा देखते ही उसका मन भर आया शादी की थी जिससे चाहत देखकर उसे हो गई आहत वह तो निकला बिल्कुल अंधा सोचती ,कर बैठी  खोटा धंधा कष्ट बहुत सहा अब न सहूंगी इससे विवाह मैं नहीं करूंगी ...

ताज

                * गीतिका *                  ÷÷÷÷÷÷÷                    (ताज)                   =====       उगता सूरज तुझसे सौंदर्य पाकर इठलाता, ढलता सूरज भी तेरे आगोश में सुख पाता; हे ताज! तू तो ठहरा दुनिया का एक अजूबा, तेरी छाया देख प्रेमी - युगल खुश  हो जाता। हर  प्यार करने वालों  की  तमन्ना  में  तू  है, तेरा रूप उन आशिक दिलों में जाए समाता। प्रेम का प्रतीक बन जगत  में  मशहूर हुआ यूं , कि कोने-कोने से हर कोई खिंचा चला आता। तमस या उजले में  दिखे, साक्षात या ख्यालों में , उम्र  के  बन्धन  तोड़ हाय ! सबको तू भरमाता।।                                         डॉ पूनम शर्मा
                                        एक मधुर गीतिका                      ---------------------                             ''सीख ले''                            •••••••••••       कठिन लगे जब भी समय, तू मुस्कुराना सीख ले ,       सब कुछ भुलाकर जगत का संग निभाना सीख ले।       मौसम  सतरंगी  बिखरी  छटा  बसन्ती  हवा  में ,       खुद  को  डुबोकर  गगन  तले  गुनगुनाना सीख ले।       फैली  हों  खुशियां  चारों  तरफ  या  आए  प्रलय ,       साहस रखकर निडर होकर खुलकर गाना सीख ले।       भरी है दुनिया चका...

कविता

सुबह-सुबह कुछ भाव यूं ही :-- चेती सी है कुछ ऐंठी सी है जिन्दगी लगे बैठी सी है गुम है किसी दुख में मगर फिर भी लगाए रखती हेठी सी है। बहती भी है न ठहरती भी है नदिया सूखती रहती भी है बही सदा जो कल-कल छल-छल आज नाली - सा रूप वह सहती भी है। मस्त है न स्वस्थ हैं प्रकृति प्रदूषणग्रस्त है हरी-भरी सुनहरी खिली सी हुई धुंधली और अस्त-व्यस्त है। जिन्दा है हां शर्मिन्दा है कर्मों पर अपने निन्दा है इंसानियत जीते जी मर रही बस यहां जीवित तो चुनिन्दा है।            डॉ पूनम शर्मा