ताज

                * गीतिका *
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                   (ताज)
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उगता सूरज तुझसे सौंदर्य पाकर इठलाता,
ढलता सूरज भी तेरे आगोश में सुख पाता;

हे ताज! तू तो ठहरा दुनिया का एक अजूबा,
तेरी छाया देख प्रेमी - युगल खुश  हो जाता।

हर  प्यार करने वालों  की  तमन्ना  में  तू  है,
तेरा रूप उन आशिक दिलों में जाए समाता।

प्रेम का प्रतीक बन जगत  में  मशहूर हुआ यूं ,
कि कोने-कोने से हर कोई खिंचा चला आता।

तमस या उजले में  दिखे, साक्षात या ख्यालों में ,
उम्र  के  बन्धन  तोड़ हाय ! सबको तू भरमाता।।

                                        डॉ पूनम शर्मा

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