कहानी ( वैलेन्टाइन डे पर विशेष)

                 

     कहानी (वैलेन्टाइन डे पर विशेष)

                               *   संयोग  *

                                     -----------------
          नीलम अपने मनपसंद सुर्ख लाल रंग की साड़ी में और उसी से मिलता मेकअप किए हुए विक्की के साथ एक सुन्दर से रेस्तरां में डिनर के लिए आई हुई थी। पहले से आरक्षित मेज पर वह अपने ही विचारों में गुम बैठी थी कि अचानक विक्की से बोली...ज उसके सौन्दर्य पर मोहित सा एकटक उसे निहार रहा था...''सुनो...कितनी गजब बात है न..."
"क्या ?"  विक्की चौंक कर कुछ विस्मृत से लहजे में बोला...
"यही...कि ईश्वर ने हमारे लिए यह दिन कितना स्पेशल बना दिया..."
 "हां...ल लेकिन इसमें गजब क्या है...?  यह तो सबके लिए खास दिन ही होता है..." कंधे उचकाते हुए विक्की ने जबाव दिया।...
       तभी माथे पर अपना दांया हाथ लगभग थपकाते हुए नीलम ने कहा,"अरे नहीं बाबा, आप समझे नहीं....मेरा मतलब है कि शादी की वर्षगांठ की तारीख.... आपको पता है कि हम हर साल जब भी आज के दिन सज-संवरकर एक साथ निकलते हैं तो सब हमें देख ऐसे घूरते हैं ... कि देखो तो इन्हें...को मनाऐ न मनाऐ पर ये चल दिए वेलेंटाइन डे मनाने... युवाओं को भी पीछे छोड़ दिया इन्होंने तो... " वे भले ही मुंह से कुछ नहीं कहते पर उनके हाव-भाव मुझे समझ आ जाते हैं। इतना ही नहीं कभी-कभी  तो एक दो ने तो टोक भी दिया है . ... तब मुझे यह समझाना पड़ा कि, "अरे नहीं...ऐसी बात नहीं.. आज हमारी शादी की वर्षगांठ है...तो बस हम तो वही सेलीब्रेट करने जा रहे हैं।  ...."  तो सामने वाला और भी अचम्भित और जिज्ञासु होकर बोल उठता है कि," अरे वाह! भाभीजी, शादी के लिए बड़ा अच्छा दिन चुना आपने या आपके माता-पिता ने... गज़ब!!!!!" और मैं.... मैं कुछ नहीं कह पाती हूं.. बस शरमाकर नजरें झुका लेती हूं।... क्योंकि हर बार वही बात दोहरा-दोहराकर थक गई हूं... अब वही बात कहने की न ताकत है न शायद जरूरत... यह हमारा दिन है... वैसे उनकी भी गलती नहीं है...
              वास्तव में जब हमारी शादी हुई थी तब ऐसा कोई दिन मनाया ही नहीं जाता था...अब यह हमारा सौभाग्य है या संयोग कि इतना सुन्दर दिन हमारी झोली में आ गया और हमारे इस यादगार दिन को और भी यादगार, रोमांटिक और प्यारा बना दिया है। हम इस दिन के साथ हर साल अपने रिश्ते को तरोताजा करते रहते हैं जिससे पता ही नहीं चल पाया कि हम कितने वैलेंटाइन डे मना चुके और कितनी शादी की सालगिरह....? विक्की, जो नीलम को बड़े प्यार और मदहोशी भरे अंदाज में देख रहा था...अब सोचने लगा कि आज भी नीलम शादी के इतने सालों बाद भी उसे वही नई-नवेली दुल्हन जैसी लग रही है...फ फिर एकाएक उसने महसूस किया कि रेस्तरां में बैठे अन्य टेबल वाले जोड़े भी उन्हें घूर रहे हैं... शायद यही सोच रहे हैं कि देखो इन अंकल-आंटी कोभी... कैसे हम युवाओं को पीछे छोड़ने की होड़ में लगे हैं...उन्हे क्या पता कि आज हमारे लिए ईश्वर ने ही कितना खास दिन बना दिया है... वह भी संयोग से...।
                                                        डॉ.पूनम शर्मा



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

चंदा मामा को पूनम का पत्र

इश्क (कविता)