दिनाँक        - 09/12/2017
                         **लघु कथा**
                            *******
       अभी - अभी एक कम्पाउंडर बड़ी तेजी से आया और उसके बेटे को ऊपर आई.सी.सी.यू. में बुलाकर ले गया। उसने कान में कुछ कहा और पलक झपकते ही उसके दोनों बेटे गायब...उसे समझते देर नहीं लगी कि कुछ खास बात है... क्योंकि अबकी बार वह लड़का आम लोगों की लिफ्ट से न आकर डाक्टर वाली से आया था...समझती भी क्यों नहीं? पूरे पांच दिनों से वह अपने पति के ठीक होने की प्रतीक्षा में उस अस्पताल में अनेक गतिविधियां देख रही थी और वहीं के मंदिर में घंटों ईश्वर से प्रार्थना करती रहती।... लेकिन अभी उस लड़के के बुलावे में और चाल दोनों में कुछ अलग ही था जिसने उसे बेचैन कर दिया... अजीब सी घबराहट..व्याकुलता...
       बहुत देर हो गई वह टहलते हुए और लिफ्ट की तरफ टकटकी लगाए थक गई उसने अपनी दोनों बेटियों की ओर देखा जो उसी की तरह परेशान थीं... तो उन्होंने उसे शान्त होने का इशारा किया और बिठा दिया... और सब ठीक होने का ढांढस बंधाया... वो इंतजार करने लगी... इंतजार... इंतजार...‌ और इंतजार करते करते ना जाने कब उसकी आंख लग गई और वह सो गयी...?  ना जाने कितनी देर तक वह सोती रही... और जब उठी तो उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी... नहीं जानती थी कि उसकी यह प्रतीक्षा चिर प्रतीक्षा में परिणत हो जाएगी।  जिसका इंतजार करते करते वह सोई थी वह उसे जीवन भर का इंतजार थमाकर खुद दूसरे-अनजाने लोक में चला गया और उसके हिस्से आया तो बस आंसुओं की धार और एक इंतजार...
        डॉ पूनम शर्मा

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