"जादू ढाई अक्षर का"
बस यूं ही.... " जादू ढाई अक्षर का " भक्तिकाल के संत कवि कबीर ने कहा है कि "ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पंडित होय।" इन पंक्तियों की गहराई का तो पता था किन्तु ढाई आखर की शक्ति आज समझ में आती है। स्पर्श, स्नेह, प्यार, प्रीत, आत्मा और तुष्टि.... ये ढाई अक्षर सम्पूर्ण जीवन का सार हैं। ये ही जिन्दगी का मूल आधार हैं। 'स्पर्श ' में वह शक्ति है जो संसार का बड़े से बड़ा ग़म अपने आगोश में समेट कर स्पर्शित काया को ' स्नेह ' रूपी तेल में डुबोकर उसे सराबोर कर देता है। 'स्नेह ' में डूबते ही मन पूरी तरह से शिशु बन जाता है एवं उस स्नेहिल सागर की अतल गहराई में डूबने-उतरने लगता है। ' प्यार की गहराई के समक्ष संसार की व्यापकता सिमट कर रह जाती है। जगत का कोई भी व्यक्ति, जीव अथवा प्राणी ऐसा नहीं है जिसे प्यार नहीं चाहिए। हर कोई दिन रात बस प्यार में खोय रहना चाहता है, ताकि वह उसको पूर्ण रूप ...