रात की कहानी उसी की जुबानी
मैं रात हूं...न जाने कितने सपनों की साक्षी...अनेक मिलन की कहानी... अनगिनत राज छुपाए रहती हूं अपने आगोश में। भरपूर जज़्बात सिर उठाते हैं मेरे आंचल तले... कुछ को आश्रय मिल जाता है तो अनेक जज्बात मर भी जाते हैं और मेरा आश्रय देने वाला वही आंचल उन जज़्बातों का कफन बन जाता है। अनेक इच्छाऐं मेरे अन्दर जन्म लेती हैं पर कम उम्र में ही मुझमें ही दफ़न हो जाती हैं।
यूं तो थके-हारे , परिश्रमी एवं व्यस्त लोगों की मैं मन भरमाने वाली, सबसे चहेती प्रेमिका हूं। मैं काली हूं फिर भी उनको सुन्दर लगती हूं... तभी तो दिनभर के उजले सौंदर्य में रहने के बावजूद पूरे दिन मेरे आने का इंतजार करते हैं। शायद मैं उनकी 'ब्लैक ब्यूटी' हूं। मेरे इस स्याहपन में छुपी हैं बचपन की परियां तो योवन का उन्माद, प्रोढ़ावस्था की चिंताऐं तो वृद्धावस्था की बेचैनी।....कहा जाता है कि काले रंग पर कोई दूसरा रंग नहीं चढ़ता पर मेरे श्याम-सलोने रंग में इंद्रधनुषी रंगों की सप्तरंगी छटाएं बिखरी रहती हैं, जो मनुष्य में आशाऐं और विश्वास जगाती हैं... उन्हें पनपने के लिए अनेक योजनाएं मैं ही तो प्रदान करती हूं। कई अवसर आते हैं उनके जीवन में पर वे भागमभाग से भरे दिन में उन पर ध्यान ही नहीं दे पाते तब मैं उन्हें अपनी गोद का आश्रय देकर प्रेम से उनके चिन्तित माथे को सहलाती हूं, तब जाकर वे शान्त चित्त से उन अनमोल अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उनको पाने की योजनाएं बनाते हैं।
मैं भी बड़े विचित्र स्वभाव की स्वामिनी हूं। किसी को सुख और सुकून प्रदान करती हूं तो किसी का छीन लेती हूं। 'ब्लैक ब्यूटी' का खिताब पाने पर जरूरी नहीं कि अच्छे और सुंदर कामों को ही शरण मिले। कभी कभी मेरा वीभत्स रूप भी प्रकट होता है... क्योंकि मेरे इस स्याहपन का लाभ अनेक लम्पट, कामी एवं अपराधी प्रवृत्ति के लोग उठाते रहते हैं। लूट-पाट, चोरी-डकैती, बलात्कार जैसे न जाने कितने ही गैरकानूनी अपराध मेरी आड़ लेकर वे कर जाते हैं और मैं निरपराध...नि:सहाय-सी देखती भर रह जाती हूं। मुझे यह सब अच्छा लगता है ऐसा कतई नहीं है परन्तु मैं कुछ कर नहीं पाती।
हां कभी-कभी अगर मेरा दांव लग जाता है तो उन अपराधियों को पकड़वाने में भी यह रात ही मदद करती है।जिस स्याहपन का लाभ उठा कर लोग अपराध करते हैं तो उसी का लाभ दिलवाकर मैं उन्हें पकड़वाने में भी सहायक होती हूं। बुरे कामों के साथ-साथ मेरी छाया तले ज्यादातर अच्छे काम भी सम्पन्न हो सकें यही मेरी कोशिश रहती है। इसीलिए शायद मणि रूपी चांद सुन्दर और शीतल तथा नगीनों रूपी तारों की सौगात मुझे मिली है। उसकी रजत चांदनी के सुन्दर आभूषण मेरा श्रृंगार करते हैं, तब मैं कुछ खुशी का अनुभव कर उठती हूं और उसी खुशी में मगन कुछ यूं गुनगुना उठती हूं----
"ये चांदनी रात... ये तारे हंसी...
ये रात अजब मतवारी है.......
डॉ पूनम शर्मा
यूं तो थके-हारे , परिश्रमी एवं व्यस्त लोगों की मैं मन भरमाने वाली, सबसे चहेती प्रेमिका हूं। मैं काली हूं फिर भी उनको सुन्दर लगती हूं... तभी तो दिनभर के उजले सौंदर्य में रहने के बावजूद पूरे दिन मेरे आने का इंतजार करते हैं। शायद मैं उनकी 'ब्लैक ब्यूटी' हूं। मेरे इस स्याहपन में छुपी हैं बचपन की परियां तो योवन का उन्माद, प्रोढ़ावस्था की चिंताऐं तो वृद्धावस्था की बेचैनी।....कहा जाता है कि काले रंग पर कोई दूसरा रंग नहीं चढ़ता पर मेरे श्याम-सलोने रंग में इंद्रधनुषी रंगों की सप्तरंगी छटाएं बिखरी रहती हैं, जो मनुष्य में आशाऐं और विश्वास जगाती हैं... उन्हें पनपने के लिए अनेक योजनाएं मैं ही तो प्रदान करती हूं। कई अवसर आते हैं उनके जीवन में पर वे भागमभाग से भरे दिन में उन पर ध्यान ही नहीं दे पाते तब मैं उन्हें अपनी गोद का आश्रय देकर प्रेम से उनके चिन्तित माथे को सहलाती हूं, तब जाकर वे शान्त चित्त से उन अनमोल अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उनको पाने की योजनाएं बनाते हैं।
मैं भी बड़े विचित्र स्वभाव की स्वामिनी हूं। किसी को सुख और सुकून प्रदान करती हूं तो किसी का छीन लेती हूं। 'ब्लैक ब्यूटी' का खिताब पाने पर जरूरी नहीं कि अच्छे और सुंदर कामों को ही शरण मिले। कभी कभी मेरा वीभत्स रूप भी प्रकट होता है... क्योंकि मेरे इस स्याहपन का लाभ अनेक लम्पट, कामी एवं अपराधी प्रवृत्ति के लोग उठाते रहते हैं। लूट-पाट, चोरी-डकैती, बलात्कार जैसे न जाने कितने ही गैरकानूनी अपराध मेरी आड़ लेकर वे कर जाते हैं और मैं निरपराध...नि:सहाय-सी देखती भर रह जाती हूं। मुझे यह सब अच्छा लगता है ऐसा कतई नहीं है परन्तु मैं कुछ कर नहीं पाती।
हां कभी-कभी अगर मेरा दांव लग जाता है तो उन अपराधियों को पकड़वाने में भी यह रात ही मदद करती है।जिस स्याहपन का लाभ उठा कर लोग अपराध करते हैं तो उसी का लाभ दिलवाकर मैं उन्हें पकड़वाने में भी सहायक होती हूं। बुरे कामों के साथ-साथ मेरी छाया तले ज्यादातर अच्छे काम भी सम्पन्न हो सकें यही मेरी कोशिश रहती है। इसीलिए शायद मणि रूपी चांद सुन्दर और शीतल तथा नगीनों रूपी तारों की सौगात मुझे मिली है। उसकी रजत चांदनी के सुन्दर आभूषण मेरा श्रृंगार करते हैं, तब मैं कुछ खुशी का अनुभव कर उठती हूं और उसी खुशी में मगन कुछ यूं गुनगुना उठती हूं----
"ये चांदनी रात... ये तारे हंसी...
ये रात अजब मतवारी है.......
डॉ पूनम शर्मा
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