एक पत्र मां का पुत्र के नाम

आयोजन संख्या-३३
विषय- पत्र
दिनांक-९.११.२०१७
मेरे कलेजे के टुकड़े के लिए एक छोटी सी पाती है, जो शायद  उसके लिए यह पहली बार लिख रही हूं।.... मैं ही क्या किसी  भी उसके लिए एक भी पत्र कभी नहीं लिखा होगा....
प्रिय सुगम,
        आज मैं जीवन के उस अनोखे सुखद अनुभव से परिचित करवाने जा रही हूं जिससे अब तक तू अछूता रह गया था... लेकिन मेरा मानना है कि मनुष्य को अन्तर्मन की गहराई तक सुख देने वाले सभी अनुभवों को महसूस करना आवश्यक है.... और सुखी जीवन का आशीर्वाद देने वाले सभी कार्य माता पिता के अतिरिक्त कौन बेहतर तरीके से करवा सकता है..... क्योंकि इंटरनेट, मोबाइल,व्हाट्स ऐप, मैसेज और न जाने कितनी ही तकनीकियों से भरे इस जमाने में एक खूबसूरत विधा से तुम बहुत दूर थे...या कहें कि अपरिचित रहे....किस्मत से मुझे तुम्हारे जन्मदिन पर ही तुम्हें पत्र लिखने का मौका मिला है तो मैं इसे कभी भी खोना नहीं चाहती.....
             हम यहां पर बिल्कुल ठीक हैं और तुम्हारी कुशलता के लिए ईश्वर से सदैव प्रार्थना करते हैं.... वैसे तो हम जानते हैं कि तुम अपने उज्जवल भविष्य के लिए आगे पढ़ाई करने हमसे इतनी दूर गये हो.... लेकिन हम इस दिल का क्या करें जो तुम्हारे लिए पल- पल तड़पता है... शायद यही हमारे रिश्ते की गहराई है कि तड़पन भी सहने की क्षमता आ जाती है क्योंकि सामने तुम्हारे सुनहरे भविष्य की तस्वीर दिखाई देने लगती है।...कमाल की बात है कि आज नौ नवंबर को तुम्हारा जन्मदिन भी है... वैसे ही याद सताए जा रही थी इसलिए खुद को पत्र लिखने से रोक नहीं पाई।
         कल की ही बात लगती है जब तुम हमारी जिंदगी में सबसे बड़ी खुशी बनकर आए थे... सपने देखती थी कि कब बड़े होओगे.... चलोगे... स्वयं खाओगे... खुद पढ़ोगे-बढ़ोगे.. यह सब हुआ भी पर बदले में बिछुड़न का दारुण दर्द सहना पड़ रहा है। कोई बात नहीं ...यह भी सह जाएंगे... तुम्हारे लिए.... मां-बाप जो ठहरे...बस अपना ख्याल रखना...थोड़े लिखे को बहुत समझना।
   जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। खूब खुश रहो... स्वस्थ रहो.... मस्त रहो... तुम्हारे इन्तजार में.... तुम्हारे प्यार में...                   
                            तुम्हारी मां
                           डॉ पूनम शर्मा

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